कृषि सुधार (Agricultural Reforms) भारतीय कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन लाने के लिए किए गए नीतिगत एवं विधायी प्रयास हैं। RPSC Syllabus में "कृषि सुधार" को PART-D के अंतर्गत रखा गया है। पिछले वर्षों में RPSC ने इस टॉपिक से 2-3 प्रश्न प्रत्येक वर्ष पूछे हैं .
कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 1970 के दशक से लगभग 2.8% की दीर्घकालिक औसत पर रही है, जबकि गैर-कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर विशेष रूप से 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद तीव्र रही है। इस अंतर के कारण कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों के प्रति कर्मचारी आय में भारी असमानता उत्पन्न हुई है .
NDA सरकार ने कृषि क्षेत्र की वृद्धि एवं किसानों के कल्याण को बढ़ावा देने हेतु दो-आयामी रणनीति (Two-pronged Strategy) अपनाई है :
| आयाम | विवरण |
|---|---|
| विकासात्मक पहल | मृदा स्वास्थ्य कार्ड, PMKSY, PMFBY, जैविक कृषि, संस्थागत ऋण, MSP पर खरीद |
| नीतिगत सुधार | E-NAM, कृषि विपणन सुधार, आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन |
उद्देश्य: किसानों को कहीं भी अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता .
विशेषताएँ: APMC मंडियों के बाहर व्यापार की अनुमति; अंतर-राज्यीय एवं अंतर-जिला व्यापार को बढ़ावा; मध्यस्थों (Middlemen) को हटाना .
लाभ: किसानों को प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त करना .
उद्देश्य: किसानों को कृषि-व्यवसाय फर्मों, प्रोसेसरों, निर्यातकों के साथ समझौता करने की अनुमति .
विशेषताएँ: मूल्य आश्वासन (Price Assurance) पर समझौता; किसानों को सुरक्षा प्रदान करना; किसान उत्पादन से पहले ही मूल्य तय कर सकते हैं .
उद्देश्य: खाद्यान्नों के भंडारण एवं व्यापार को उदार बनाना .
विशेषताएँ: गेहूँ, चावल, दालों पर भंडारण सीमा हटाई गई; अत्यधिक मूल्य वृद्धि की स्थिति में ही सरकारी हस्तक्षेप .
लाभ: निजी निवेश को भंडारण एवं आपूर्ति श्रृंखला में आकर्षित करना .
कवरेज: 100 जिले (सबसे कम कृषि उत्पादकता वाले) .
उद्देश्य: कृषि उत्पादकता बढ़ाना; फसल विविधीकरण; सिंचाई सुविधाओं में सुधार .
विकास: ICAR ने 2014-2024 के बीच 2,900 से अधिक नई फसल किस्मों का विकास किया है .
विशेषता: जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) किस्मों पर विशेष फोकस .
लाभ: ₹6,000/वर्ष — 9.44 करोड़+ किसान .
कृषि विपणन (Agricultural Marketing) कृषि उपज को किसानों से उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की संपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री शामिल हैं .
| क्र. | उद्देश्य | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | उचित मूल्य | किसानों को उनकी उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाना |
| 2 | बाजार तक पहुँच | किसानों को प्रतिस्पर्धी बाजारों तक पहुँच प्रदान करना |
| 3 | खाद्यान्न अपव्यय | भंडारण एवं परिवहन में होने वाली क्षति को कम करना |
| 4 | मूल्य स्थिरता | बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम करना |
| 5 | गुणवत्ता संवर्धन | उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना |
APMC अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अधिनियमित किए गए, जिनका उद्देश्य किसानों को अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से बचाना था .
नियमन: कृषि उपज की मंडियों (Markets) का विनियमन .
एकाधिकार: APMC के पास एकाधिकार (Monopoly) था .
समस्या: कम प्रतिस्पर्धा; किसानों को कम मूल्य; मध्यस्थों (Middlemen) का प्रभुत्व .
उद्देश्य: APMC मंडियों को नेटवर्क कर पैन-इंडिया एकीकृत कृषि बाजार बनाना .
महत्व: ऑनलाइन नीलामी (Online Auction); पारदर्शी मूल्य निर्धारण; किसानों को बेहतर मूल्य .
सुविधाएँ: स्वचालित बोली प्रणाली; मांग-आपूर्ति डेटा; लॉजिस्टिक्स सहायता; फिनटेक सेवाएँ .
उद्देश्य: Economies of Scale प्राप्त करना .
लाभ: बेहतर मूल्य (Better Price); उन्नत प्रौद्योगिकी (Better Technology); सामूहिक विपणन (Collective Marketing) .
Model APMC Act, 2003 को केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए बनाया था ताकि वे अपने APMC कानूनों में सुधार कर सकें .
विशेषताएँ: निजी मंडियों की अनुमति; एकल लाइसेंस; प्रत्यक्ष विपणन; ई-ट्रेडिंग .
| चुनौती | विवरण |
|---|---|
| खंडित बाजार | छोटे-छोटे बाजार — पैमाने की अर्थव्यवस्थाएँ नहीं |
| मध्यस्थों का प्रभुत्व | मध्यस्थ अधिकांश लाभ लेते हैं |
| भंडारण एवं परिवहन | अपर्याप्त भंडारण सुविधाएँ, परिवहन लागत अधिक |
| फसल-उपरांत हानि | 10-15% फसल-उपरांत हानि |
| गुणवत्ता मानक | गुणवत्ता में अंतर्राष्ट्रीय मानकों से पिछड़ापन |
| सूचना का अभाव | किसानों को बाजार मूल्य एवं माँग की जानकारी नहीं |
प्रमुख मंडियाँ: श्रीगंगानगर (गेहूँ), कोटा (चना), बीकानेर (मूंगफली), जोधपुर (सरसों) .
राजस्थान मंडी बोर्ड: राज्य स्तरीय विनियामक निकाय .
उद्देश्य: विपणन अवसंरचना को सुदृढ़ करना; भंडारण क्षमता बढ़ाना; फसल-उपरांत हानि कम करना .